बजट से पहले बीमा को लेकर गांव की उम्मीद
Insurance Hopes from Budget – Voice of the Village
नई दिल्ली।
बीमा आज शहर की ही नहीं, गांव की भी जरूरत बन गया है। बीमारी आ जाए, कोई हादसा हो जाए या खेत-खलिहान में नुकसान हो जाए—तो सबसे पहले आदमी यही सोचता है कि कहीं बीमा काम आएगा या नहीं। इस बार बजट से गांव-देहात के लोगों को भी बीमा को लेकर काफी उम्मीद है।
सरकार कह रही है कि 2047 तक सबको बीमा मिलेगा। बात अच्छी है, लेकिन गांव में लोग पूछ रहे हैं—ये होगा कैसे?
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बीमा कम लोगों तक पहुंच रहा है
Insurance Not Reaching Enough People
आज भी गांव में बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई बीमा नहीं है।
कई लोगों को पता ही नहीं कि बीमा कैसे लिया जाता है, कितने पैसे देने होते हैं और फायदा क्या मिलता है।
जब तक गांव-गांव बीमा नहीं पहुंचेगा, तब तक सबको बीमा देने की बात अधूरी ही रहेगी।
महंगाई बढ़ी, इलाज महंगा हुआ
Treatment Cost Rising, Relief Missing
आज इलाज बहुत महंगा हो गया है।
दवा, जांच, अस्पताल—सबका खर्च हर साल बढ़ता जा रहा है। बुज़ुर्गों के लिए तो हालत और खराब है।
लेकिन बीमा लेने पर जो टैक्स में छूट मिलती है, वह कई साल से वही की वही है।
लोग कहते हैं—खर्च बढ़ रहा है, लेकिन राहत नहीं बढ़ रही।
भरोसा अभी भी कमजोर है
People Still Don’t Fully Trust Insurance
सरकार ने बीमा पर टैक्स हटाया, यह अच्छी बात है।
लेकिन गांव में लोग आज भी कहते हैं—
“बीमा तो ले लें, लेकिन पैसा मिलेगा भी या नहीं?”
कई बार अस्पताल बीमा मानने से मना कर देते हैं, कभी कागज में दिक्कत आ जाती है। इसी वजह से लोग डरते हैं।
बाहर की कंपनियां आएंगी, फायदा मिलेगा क्या?
Foreign Investment – Will Common People Benefit?
सरकार ने कहा है कि अब बीमा में बाहर की कंपनियां भी पूरा पैसा लगा सकती हैं।
कागज पर यह फैसला अच्छा लगता है।
लेकिन गांव में सवाल सीधा है—
“इससे हमारा प्रीमियम सस्ता होगा या नहीं?”
अगर बीमा सस्ता हुआ और कवर अच्छा मिला, तभी इसका मतलब है।
आयुष्मान योजना में भी दिक्कत
Ayushman Scheme Faces Ground Problems
आयुष्मान भारत योजना से गरीबों को इलाज मिल रहा है, यह सही है।
लेकिन कई जगह अस्पताल इलाज करने से मना कर देते हैं या टालमटोल करते हैं।
लोग चाहते हैं कि बजट में ऐसा नियम बने जिससे कोई अस्पताल गरीब आदमी को लौटाए नहीं।
मजदूर और गिग काम करने वालों की चिंता
Daily Workers Still Outside Insurance
आज बहुत लोग दिहाड़ी पर काम करते हैं, कहीं डिलीवरी करते हैं, कहीं खेत में मजदूरी।
इनके पास नौकरी पक्की नहीं है, तो बीमा भी नहीं है।
अगर सरकार मालिकों को कहे कि मजदूरों का बीमा कराओ, तो बहुत लोगों को राहत मिलेगी।
बाढ़-सूखा आता है, बीमा नहीं
Floods Come, But Insurance Doesn’t
हर साल कहीं बाढ़ आती है, कहीं सूखा पड़ता है।
फसल खराब होती है, घर गिर जाते हैं।
सरकार बाद में मदद तो देती है, लेकिन अगर पहले से बीमा हो तो नुकसान कम हो सकता है।
गांव के लोग कहते हैं—बीमा पहले होना चाहिए, बाद में मदद नहीं।
गांव का सीधा सवाल
The Village Asks One Simple Question
गांव के आदमी के लिए बजट में एक ही सवाल होता है—
“हमारे काम का क्या है इसमें?”
अगर बीमा सस्ता होगा, इलाज आसान होगा और भरोसा बनेगा,
तो लोग खुद बीमा लेंगे।
अब देखना है कि इस बार का बजट गांव के आदमी की इस उम्मीद पर खरा उतरता है या नहीं।