Surat Katargam TP Scheme: Protest ke beech 70+ societies ko notice

On: February 3, 2026 11:48 PM
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कटारगाम में टीपी स्कीम के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन, 70 से अधिक सोसाइटियों को मिले डिमोलिशन नोटिस के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे

गरीबों को सपनों का घर देने की बात करने वाली सरकार के राज में सूरत में 70 हजार से अधिक लोग होंगे बेघर?

Katargaam में टीपी स्कीम आरक्षण के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा

एक तरफ सरकार गरीबों को पक्का और सपनों का घर देने के बड़े-बड़े वादे करती है, वहीं दूसरी ओर गुजरात के सूरत शहर में एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिससे 70 हजार से अधिक लोगों के बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है।

सूरत महानगरपालिका (SMC) ने शहर के कतारगाम क्षेत्र में लागू की गई टीपी स्कीम नंबर 49, 50 और 51 के तहत 70 से अधिक सोसाइटियों को डिमोलिशन नोटिस जारी कर दिए हैं। इस फैसले के विरोध में अब स्थानीय लोगों का आक्रोश सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है।

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सड़कों पर उतरे हजारों लोग, महा रैली का आयोजन

डिमोलिशन नोटिस के विरोध में हजारों की संख्या में लोग कतारगाम दरवाजा से लेकर नगर आयुक्त कार्यालय तक एक विशाल रैली के रूप में निकले। प्रदर्शनकारियों ने नगर आयुक्त और मेयर को सौंपकर टीपी स्कीम के तहत लगाए गए आरक्षण को तत्काल रद्द करने की मांग की।

लोगों के हाथों में बैनर थे जिन पर लिखा था—

  1. “हमारी मांगें पूरी करो”
  2. “डिमोलिशन हटाओ”
  3. “हमारा मकान, हमारा अधिकार”
  4. “विकास के नाम पर विनाश बंद करो”

20–25 साल पुरानी रिहायशी संपत्तियों पर आरक्षण कितना जायज हे चलिए जानते हे ?

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे 20 से 25 वर्षों से अपनी वैध रिहायशी संपत्तियों में रह रहे हैं
उनका आरोप है कि 2022 से पहले इन जमीनों पर किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं था। सरकारी रिकॉर्ड की जांच करने के बाद ही लोगों ने ये मकान और प्लॉट खरीदे थे।

अब अचानक आरक्षण लगाकर उन्हें उजाड़ने की तैयारी की जा रही है, जो सीधा अन्याय है।

नेताओं की आपसी खींचतान में जनता को बेघर करने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जब कातलगाम के विधायक विनोद मोरडिया विकास मंत्री बने थे, तब यह आरक्षण हटा दिया गया था।
लेकिन नया मंत्रिमंडल बनने के बाद फिर से इन्हीं संपत्तियों पर आरक्षण लागू कर दिया गया।

लोगों का आरोप है कि नेताओं की अंदरूनी राजनीतिक लड़ाई का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

“वोट मांगने आए तो जवाब भी मिलेगा” – जनता की चेतावनी

गुस्साए लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि—

“अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो जो नेता वोट मांगने आएंगे, उन्हें वोट नहीं मिलेगा।”

पिछले तीन वर्षों से लोग इस फैसले के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।

सवाल बरकरार: फैसला बदलेगी मनपा या हजारों को करेगी बेघर?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि

  • क्या सूरत महानगरपालिका अपना फैसला वापस लेगी?
  • या फिर विकास के नाम पर हजारों लोगों को बेघर कर दिया जाएगा?

कतारगाम में उठ रही विरोध की यह आग अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।

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