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Tez Hawa aur barish ne Kisanon ki Rabi Fasal Barbaad Kar Di। तेज़ हवा और बारिश ने किसानों की सालभर की मेहनत मिट्टी में मिला दी

On: February 9, 2026 9:03 PM
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Tez hawa aur mawathe ke baad khet mein bichi hui gehu ki fasal, aandhi-barish se kisanon ko bhari nuksaan.

तेज़ तूफान और बेमौसम बारिश ने फसल पर पानी फेर दिया

10–20 मिनट की बारिश में किसानों की महीनों की मेहनत चौपट हो गई ।

सोमवार को तेज़ आंधी और बेमौसम बारिश ने किसानों की रबी सीज़न की फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया। गेहूं, बाजरा, ज्वार और मक्का की खड़ी फसल तेज़ हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गई। शीतकालीन फसल अब कटाई के बिल्कुल करीब थी, लेकिन जैसे खरीफ सीज़न में मौसम ने धोखा दिया था, वैसे ही इस बार भी किसानों के मुँह से तैयार निवाला छीन लिया गया।

गिर सोमनाथ ज़िले के कई गांवों में भारी नुकसान

यह दृश्य गिर सोमनाथ ज़िले के कोडीनार और सुतरापाड़ा क्षेत्र के हैं, जहाँ मात्र 15 से 20 मिनट में फतराटकी, भुवाटीबी, मोरडिया जैसे गांवों में तेज़ हवा के साथ मावठा (बेमौसम बारिश) आ गई।
मिनी बवंडर जैसी स्थिति बनने का दावा किया जा रहा है, जिससे खेतों में खड़ी पूरी फसल गिर पड़ी।

गेहूं ज़मीन से चिपक गया, अब कटाई नामुमकिन हे ।

किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल को अंतिम सिंचाई दी जा चुकी थी और अब कटाई का समय आ गया था। लेकिन तेज़ हवा और बारिश ने गेहूं को पूरी तरह जमीन से चिपका दिया।
खेतों में गिरा गेहूं अब न तो सही से सूख पाएगा और न ही दाने भर पाएंगे, जिससे उत्पादन लगभग शून्य होने की आशंका है।

आम की बागवानी और अन्य फसलो पर भी पड़ा असर ।

सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि आम की खेती करने वाले किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। आम के पेड़ों पर आया बौर झड़ गया।
बाजरा और ज्वार की फसल भी खेतों में बिछ गई है। किसानों का कहना है कि देखने में ही साफ लग रहा है कि इस बार फसल से कुछ भी हाथ लगने वाला नहीं है।

मुंह का निवाला छिन गया – किसानों का दर्द देखा नहीं जाता

क्या कहना हे किसान भाइयों का

“हमने पूरी लागत लगा दी थी। मंडी से जो थोड़ा पैसा आया था, वही इस फसल में डाल दिया। अब जब कटाई का समय आया, तब सब कुछ खत्म हो गया। ऐसा नुकसान हमने अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं देखा।”

किसानों का कहना है कि उनकी आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। सारी उम्मीद इसी रबी फसल पर टिकी थी, लेकिन बेमौसम बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।

बार-बार मौसम की मार से किसान टूट चुके हैं

किसानों ने बताया कि पिछले दो वर्षों से लगातार कभी खरीफ तो कभी रबी सीज़न में मौसम की मार झेलनी पड़ रही है।
दीवाली के समय भी फसल खराब हुई थी और अब फिर वही हालात बन गए हैं। खेतों में गिरी फसल अब सड़ने की कगार पर है और दाने पूरी तरह बेकार हो जाएंगे।

सरकार से मुआवज़े की मांग

किसानों ने सरकार से मांग की है कि इस प्राकृतिक आपदा को गंभीरता से लिया जाए।
किसानों का कहना है कि यह नुकसान उनके बस की बात नहीं है और अगर समय पर मुआवज़ा नहीं मिला तो वे पूरी तरह टूट जाएंगे।

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